अध्याय 1: प्राचीन सभ्यताओं की नींव – सिंधु और गंगा घाटी
Synopsis
सिंधु घाटी सभ्यता का परिचय
सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में से एक थी। इसकी खोज हरप्पा और मोहनजोदड़ो जैसे नगरों से हुई, जिसने उत्तर भारत के ऐतिहासिक विकास की नींव रखी।
सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन और उन्नत नगरीय सभ्यताओं में से एक मानी जाती है। इसका काल लगभग 3300 ईसा पूर्व से 1500 ईसा पूर्व तक माना जाता है। इसकी खोज सबसे पहले 1921 ई. में हरप्पा (पंजाब, पाकिस्तान) और 1922 ई. में मोहनजोदड़ो (सिंध, पाकिस्तान) में हुई। इस कारण इसे हरप्पा सभ्यता भी कहा जाता है।
यह सभ्यता सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे विकसित हुई थी। यहां के लोग संगठित नगर नियोजन, जल-निकासी प्रणाली, कृषि और व्यापार में अत्यंत दक्ष थे। सभ्यता का विस्तार आज के पाकिस्तान, उत्तर-पश्चिम भारत और अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों तक था।
विशेषताएँ और उदाहरण
1. नगर नियोजन
हरप्पा और मोहनजोदड़ो में ईंटों से बने घर, चौड़ी सड़कें और सुव्यवस्थित जल-निकासी प्रणाली मिली, जो आधुनिक शहरों की तरह सुनियोजित थी।
उदाहरण: मोहनजोदड़ो का "महान स्नानागार (Great Bath)" उस समय की उन्नत इंजीनियरिंग और सामाजिक-धार्मिक जीवन का प्रमाण है।
2. कृषि और अर्थव्यवस्था
यहाँ गेहूँ, जौ, कपास और तिलहन जैसी फसलें बोई जाती थीं। बैल और बैलगाड़ियों का प्रयोग खेती और परिवहन में किया जाता था।
उदाहरण: लोथल (गुजरात) में पाई गई गोदी (Dockyard) से यह पता चलता है कि यह लोग समुद्री व्यापार में भी संलग्न थे।
3. धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन
इन लोगों की आस्थाएँ प्रकृति, उर्वरता और पशुपालन से जुड़ी थीं। "पशुपति महादेव की मुहर" से यह अनुमान मिलता है कि शिव पूजा या समान प्रकार की आस्था प्रचलित थी।
उदाहरण: माँ देवी (Mother Goddess) की मूर्तियाँ, जो प्रजनन और समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं।
4. लेखन और मुहरें:
सिंधु लिपि अब तक अपठनीय है, लेकिन मुहरों पर अंकित चिह्न और चित्र सभ्यता की आर्थिक और धार्मिक गतिविधियों का संकेत देते हैं।
उदाहरण: बैल और एक सींग वाले जानवर (Unicorn) की आकृति वाली मुहरें।
