अध्याय 9: औपनिवेशिक शक्तियों का आगमन और प्रारंभिक संघर्ष
Synopsis
यूरोपीय व्यापारियों का आगमन
पुर्तगाली, डच, फ्रांसीसी और अंग्रेज भारत आए। वास्को-डी-गामा का 1498 में आगमन एक ऐतिहासिक घटना थी।
भारत में यूरोपीय व्यापारियों का आगमन एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मोड़ था जिसने भारतीय राजनीति, अर्थव्यवस्था और संस्कृति को गहराई से प्रभावित किया। सबसे पहले पुर्तगाली व्यापारी भारत आए। वास्को-डी-गामा ने 1498 ई. में कालीकट (वर्तमान कोष़िकोड, केरल) के तट पर पहुँचकर भारत और यूरोप के बीच नए समुद्री मार्ग की खोज की। यह घटना न केवल पुर्तगाल बल्कि पूरे यूरोप के लिए ऐतिहासिक महत्व की थी। इसके बाद पुर्तगालियों ने गोवा को अपने मुख्य केंद्र के रूप में विकसित किया और मसालों के व्यापार पर अधिकार जमाया।
डच व्यापारी सत्रहवीं शताब्दी की शुरुआत में भारत पहुँचे। उन्होंने पुर्तगालियों की एकाधिकारवादी नीतियों को चुनौती दी और कोचीन, नागपट्टनम तथा मलक्का जैसे बंदरगाहों से व्यापार किया। यद्यपि धीरे-धीरे डचों का प्रभाव घटा और वे मुख्यतः इंडोनेशिया की ओर केंद्रित हो गए।
फ्रांसीसी व्यापारी भी 1664 में ईस्ट इंडिया कंपनी बनाकर भारत आए। उन्होंने पांडिचेरी, चंद्रनगर और करैकल जैसे स्थानों पर अपनी बस्तियाँ बसाईं। फ्रांसीसियों का भारत में प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहा, लेकिन अंग्रेजों से प्रतिस्पर्धा में वे लंबे समय तक टिके रहे।
अंग्रेज व्यापारी सबसे प्रभावशाली साबित हुए। 1600 ई. में "ईस्ट इंडिया कंपनी" की स्थापना कर उन्होंने भारत में व्यापार शुरू किया। प्रारंभ में उन्होंने सूरत, मद्रास, बॉम्बे और कलकत्ता जैसे बंदरगाहों पर अपने कारखाने (फैक्ट्रियाँ) स्थापित कीं। समय के साथ उन्होंने व्यापार के बहाने राजनीतिक हस्तक्षेप शुरू किया और अंततः भारत पर अपना औपनिवेशिक शासन स्थापित किया।
इस प्रकार, यूरोपीय व्यापारियों का आगमन केवल वाणिज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने भारत के भविष्य की दिशा बदल दी। यह काल भारतीय इतिहास में औपनिवेशिक युग की शुरुआत का संकेतक बना।
