अध्याय-3 सिर्फ काम नहीं, मानसिक बोझ

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अगर आप उससे पूछें — 
“तुम दिन भर क्या करती हो?” 

तो वह शायद कामों की सूची गिना देगी — 
खाना, सफाई, कपड़े, बच्चों की देखभाल। 

लेकिन जो वह नहीं गिनाएगी, 
वह है — सोचना। 

क्योंकि उसका सबसे बड़ा श्रम हाथों से नहीं, 
दिमाग से होता है। 

और यही है — मानसिक बोझ। 

वह जो हमेशा सोचती रहती है 

सुबह उठते ही उसके दिमाग में एक अदृश्य चेकलिस्ट चलने लगती है: 

  • आज बच्चों का कौन-सा पीरियड है? 

  • टिफिन में क्या भेजूँ कि वे पूरा खाएँ? 

  • दूध कल कम बचा था, आज लाना है। 

  • पापा की दवा खत्म होने वाली है। 

  • अगले हफ्ते राखी है, तैयारी करनी है। 

इनमें से कितने काम उसने अभी किए हैं? 

एक भी नहीं। 

लेकिन उसका दिमाग पहले से दौड़ रहा है। 

यह दौड़ दिन भर चलती है। 
बिना रुके। 
बिना शोर के। 

 

Published

March 8, 2026

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How to Cite

अध्याय-3 सिर्फ काम नहीं, मानसिक बोझ . (2026). In अदृश्य श्रम:  महिलाओं का वह कार्य  जो अर्थव्यवस्था  को जीवित रखता है. Wissira Press. https://books.wissira.us/index.php/WIL/catalog/book/70/chapter/561