अध्याय-5 जिसका वेतन शून्य है

Authors

Synopsis

हर महीने की एक तारीख़ होती है — 
जब वेतन खाते में आता है। 

घर में हल्की-सी राहत फैलती है। 
खर्चों की सूची निकलती है। 
बिजली बिल, स्कूल फीस, किराना, EMI… 

लेकिन क्या कभी उस सूची में 
उसका नाम लिखा जाता है? 

नहीं। 

क्योंकि उसका वेतन शून्य है। 

शून्य — जो वास्तव में शून्य नहीं 

अगर वेतन ही मूल्य का प्रमाण है, 
तो वह शून्य है। 

लेकिन अगर योगदान से मूल्य तय हो, 
तो वह अमूल्य है। 

उसके काम का कोई सैलरी स्लिप नहीं। 
कोई बैंक ट्रांजैक्शन नहीं। 
कोई बोनस नहीं। 

फिर भी उसका श्रम रोज़ खर्च होता है — 
समय में, ऊर्जा में, धैर्य में।  

अगर उसे वेतन मिले तो? 

कल्पना कीजिए। 

हम घर के हर काम की कीमत तय करें: 

  • खाना बनाना 

  • सफाई 

  • कपड़े धोना 

  • बच्चों को पढ़ाना 

  • बुज़ुर्गों की देखभाल 

  • बजट बनाना 

अगर यह सब अलग-अलग लोगों से करवाया जाए, 
तो हर महीने कितनी राशि लगेगी? 

Published

March 8, 2026

License

Creative Commons License

This work is licensed under a Creative Commons Attribution 4.0 International License.

How to Cite

अध्याय-5 जिसका वेतन शून्य है . (2026). In अदृश्य श्रम:  महिलाओं का वह कार्य  जो अर्थव्यवस्था  को जीवित रखता है. Wissira Press. https://books.wissira.us/index.php/WIL/catalog/book/70/chapter/563