अध्याय-11 दूध एवं दुग्ध-उत्पाद: संरचना, उपयोगिता और सावधानियाँ
Synopsis
दूध
पोषण महत्व, प्रकार एवं स्वास्थ्य प्रभाव
दूध को प्रकृति का एक महत्वपूर्ण और पौष्टिक उपहार माना जाता है। भारतीय परंपरा में प्राचीन काल से ही दूध तथा उससे बने पदार्थ—दही, घी और पनीर—को श्रेष्ठ आहार का स्थान प्राप्त है। विभिन्न संस्कृतियों में इसे बच्चों, युवाओं, रोगियों और बुजुर्गों के लिए उपयोगी भोजन के रूप में स्वीकार किया गया है।
आधुनिक पोषण विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि दूध में अनेक आवश्यक पोषक तत्व उपस्थित होते हैं, जो शरीर के विकास, मरम्मत और रखरखाव के लिए अनिवार्य हैं।
प्रमुख पोषक तत्व- दूध में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं: उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, विटामिन B12, विटामिन B2 (राइबोफ्लेविन), विटामिन D (विशेषकर फोर्टिफाइड दूध में), स्वस्थ वसा (विशेषकर पूर्ण दूध में), पानी (लगभग 85–87%)
इन गुणों के कारण दूध को संतुलित आहार का अभिन्न अंग माना जाता है।
सामान्य पोषण तालिका (प्रति 100 ml – औसत)
पोषक तत्व
अनुमानित मात्रा
शरीर में भूमिका
ऊर्जा
60–70 kcal
दैनिक ऊर्जा
प्रोटीन
3–3.5 g
मांसपेशी विकास
वसा
3–4 g
ऊर्जा व हार्मोन संतुलन
कार्बोहाइड्रेट (लैक्टोज)
4–5 g
ऊर्जा स्रोत
कैल्शियम
110–130 mg
हड्डी व दांत मजबूती
फॉस्फोरस
90–100 mg
कोशिका कार्य
पोटैशियम
140–160 mg
रक्तचाप संतुलन
स्वास्थ्य लाभ
1. हड्डियों और दांतों के लिए- कैल्शियम तथा विटामिन D का संयोजन हड्डियों और दांतों की मजबूती में सहायक है। विशेषकर बच्चों और किशोरों के विकास काल में इसका महत्व अधिक है।
किस रोग से बचाव: ऑस्टियोपोरोसिस, दांतों की कमजोरी
2. मांसपेशियों के लिए- दूध का उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और वृद्धि में सहायक होता है।
3. बच्चों और युवाओं के विकास में- विकासशील आयु में दूध ऊर्जा और पोषण का प्रभावी स्रोत है।
4. बुजुर्गों के लिए- उचित मात्रा में सेवन हड्डियों की कमजोरी से बचाव में सहायक हो सकता है।
5. ऊर्जा प्रदान करना- लैक्टोज और वसा शरीर को त्वरित एवं स्थायी ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं।
विभिन्न प्रकार के दूध
1. गाय का दूध- अपेक्षाकृत हल्का, मध्यम वसा, अधिक सुपाच्य माना जाता है
2. भैंस का दूध- वसा अधिक, गाढ़ा और ऊर्जादायक, कुछ व्यक्तियों को भारी लग सकता है
3. बकरी का दूध- अपेक्षाकृत हल्का, छोटे वसा कणों के कारण
